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मुजफ्फरपुर -: सदपुरा नीम चौक मुस्लिम लाइब्रेरी में स्वतंत्रा सेनानी अशफाक उल्ला खान एवं राम प्रसाद बिस्मिल की शहादत दिवस पर स्वतंत्रा सेनानी सम्मेलन मनाया गया है।

बिहार-मुज़फ्फरपुर-:
दिनांक 19 12 2020 को सदपुरा नीम चौक मुस्लिम लाइब्रेरी में स्वतंत्रा सेनानी अशफाक उल्ला खान एवं राम प्रसाद बिस्मिल की शहादत दिवस पर स्वतंत्रा सेनानी सम्मेलन मनाया गया है।
अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ, भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रान्तिकारी थे। उन्होंने काकोरी काण्ड में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। ब्रिटिश शासन ने उनके ऊपर अभियोग चलाया और १९ दिसम्बर सन् १९२७ को उन्हें फैजाबाद जेल में फाँसी पर लटका कर मार दिया गया। राम प्रसाद बिस्मिल की भाँति अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ भी उर्दू भाषा के बेहतरीन शायर थे।

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देश पर शहीद हुए इस शहीद की यह रचना :

• कस ली है कमर अब तो, कुछ करके दिखाएँगे, आज़ाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे।
• हटने के नहीं पीछे, डर कर कभी जुल्मों से, तुम हाथ उठाओगे, हम पैर बढ़ा देंगे।
• बेशस्त्र नहीं है हम, बल है हमें चरखे का, चरखे से जमीं को हम, ता चर्ख गुँजा देंगे।
• परवा नहीं कुछ दम की, गम की नहीं, मातम की, है जान हथेली पर, एक दम में गवाँ देंगे।
• उफ़ तक भी जुबां से हम हरगिज न निकालेंगे, तलवार उठाओ तुम, हम सर को झुका देंगे।
• सीखा है नया हमने लड़ने का यह तरीका, चलवाओ गन मशीनें, हम सीना अड़ा देंगे।
• दिलवाओ हमें फाँसी, ऐलान से कहते हैं, खूं से ही हम शहीदों के, फ़ौज बना देंगे।
• मुसाफ़िर जो अंडमान के तूने बनाए ज़ालिम, आज़ाद ही होने पर, हम उनको बुला लेंगे।

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सम्मेलन की अध्यक्षता छात्र नेता हैदर निजामी और संचालक असलम रहमानी ने किया इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में M N रिजवी ने कहा कि इन शहीदों की शहादत दिवस के अवसर पर हम देश को याद करते हैं और हम भारत के हैं और लोकतंत्र मेहम अर्थात जनता ही ताकतवर है. वही प्रोफेसर अरविंद कुमार डे ने कहा कि राजनीति देश में होता है पहले सरहदें देश की होती थी अब देश में ही किसान आंदोलन को कुचलने के लिए दिल्ली पर सरहद बना दिया गया है. इस अवसर पर हैदर निजामी ने कहा है कि भारत के शहीद हमारे आदर्श हैं. इस अवसर पर कौमी असातजा तंजीम के प्रदेश संयोजक मोहम्मद रफी ने कहा है कि भारत के स्वतंत्र आंदोलन की बात होती है तो हमारे मानस पटल पर महात्मा गांधी मौलाना अबुल कलाम आजाद पंडित जवाहरलाल नेहरु डॉक्टर अंबेडकर और सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम आते हैं मगर हमें अशफाक उल्ला खान राम प्रसाद बिस्मिल को शहादत की शहादत को बुलाना नहीं चाहिए मोहम्मद रफी ने कहा है कि हम उन सभी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिसने किसी रूप में भी मूल को स्वतंत्र कराने के योगदान दिया वहीं मौलाना शौकत अली ने भी कहा कि हमें अपने पूर्वजों को भी याद करना चाहिए और उनके रास्ते पर चलना चाहिए सभा के अंत में धन्यवाद ज्ञापन ताबिश खबर ने किया और उपस्थित वक्ताओं का धन्यवाद. किया

सभा में उपस्थित प्रोफेसर इम्तियाज मोहम्मद जियाउल्लाह. मोहम्मद शाकिर. मोहम्मद मतीन. गुड्डू कुमार. मोहम्मद साकिब, मोहम्मद शाहिद ,मोहम्मद शाहनवाज, मोहम्मद खुर्शीद , शाहिद अली कुरेशी, मोहम्मद सिद्दीकी, संतोष अंबेडकर ,मोहम्मद राजा , इत्यादि उपस्थित थे

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